विदेशी फंडिंग, 2000 संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट और यूट्यूबरों की भूमिका की जांच तेज
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन को लेकर जांच एजेंसियों ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। सूत्रों के मुताबिक, विदेशी फंडिंग, संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और सोशल मीडिया के जरिए चलाए गए अभियान की कई पहलुओं से जांच की जा रही है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि प्रदर्शन के लिए धन किन माध्यमों से जुटाया गया और इसका इस्तेमाल किस प्रकार किया गया।
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियों के रडार पर पांच से अधिक कंपनियां हैं। इनमें डिजिटल मार्केटिंग और सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर के साथ काम करने वाली कंपनियां भी शामिल हैं। पिछले तीन दिनों के दौरान मुंबई, बेंगलुरु, गुरुग्राम और दिल्ली में कई ठिकानों पर छापेमारी की गई। इस दौरान वित्तीय लेन-देन, कैंपेन से जुड़े दस्तावेज, इंफ्लूएंसर एग्रीमेंट और अन्य रिकॉर्ड की जांच की गई। कुछ डिजिटल डिवाइस भी जब्त किए गए हैं।
प्रारंभिक जांच में कुछ संदिग्ध वित्तीय लेन-देन सामने आने की बात कही जा रही है। सूत्रों का दावा है कि इन लेन-देन के आधार पर कुछ सोशल मीडिया इंफ्लूएंसरों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है। एजेंसियां डिजिटल और लिखित साक्ष्य जुटा रही हैं। पर्याप्त सबूत मिलने के बाद मामले में एफआईआर दर्ज किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
2000 से अधिक संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान
जांच में करीब 2,000 संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान होने की जानकारी सामने आई है। इनमें कई अकाउंट विदेशों से संचालित बताए जा रहे हैं, जबकि लगभग 700 अकाउंट भारत से संचालित होने का दावा किया गया है। जांच एजेंसियां इन खातों से जुड़े डिजिटल डेटा को सुरक्षित रखने और उनकी गतिविधियों का विश्लेषण कर रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, एआई की मदद से संपादित वीडियो और भ्रामक पोस्ट प्रसारित कर प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों की छवि प्रभावित करने की कोशिश किए जाने के आरोपों की भी जांच की जा रही है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
जैश के संदिग्ध आतंकी की साजिश का दावा
इस बीच, पश्चिम बंगाल एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार जैश-ए-मोहम्मद के संदिग्ध आतंकी हामिम मंडल से पूछताछ में भी अहम जानकारियां मिलने का दावा किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, उसने दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस की वर्दी पहनकर तोड़फोड़ की साजिश रची थी। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ पुलिस अधिकारी और राजनेता भी उसके निशाने पर थे। इन दावों की जांच जारी है।
कुछ यूट्यूबर भी जांच के दायरे में
सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शन और उससे जुड़े घटनाक्रम में कुछ यूट्यूबरों की भूमिका भी जांच एजेंसियों के रडार पर है। एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि क्या सोशल मीडिया कंटेंट के प्रचार-प्रसार के लिए किसी तरह का वित्तीय लेन-देन हुआ था। फिलहाल किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ एजेंसियों की ओर से अंतिम निष्कर्ष या आधिकारिक आरोप सार्वजनिक नहीं किए गए हैं और जांच जारी है।

