उन्नाव: जिले में वैध से ज्यादा अवैध आतिशबाजी का कारोबार होने के आरोपों के बीच सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक जिले में बिक्री और भंडारण के 109 लाइसेंस हैं, लेकिन पटाखा निर्माण का एक भी लाइसेंस नहीं है। इसके बावजूद पुरवा, बीघापुर, हसनगंज, बांगरमऊ, औरास, मौरावां और अन्य इलाकों में चोरी-छिपे पटाखे बनाने की गतिविधियां सामने आती रही हैं।
कन्नौज में अवैध पटाखा फैक्ट्री विस्फोट के बाद भी उन्नाव में बड़े स्तर पर कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी लाइसेंसधारकों का सत्यापन होगा और भंडारण व बिक्री की जांच की जाएगी।
20 करोड़ का कारोबार, कई जिलों तक सप्लाई
सूत्रों के अनुसार जिले में हर साल करीब 20 करोड़ रुपये का पटाखा कारोबार होता है। कम कीमत पर तैयार होने वाले पटाखे लखनऊ, कानपुर, हरदोई, रायबरेली और फतेहपुर तक पहुंचते हैं।
वर्षों से दोहराते रहे हैं बड़े हादसे
2006 से 2024 तक जिले में बारूद और पटाखों से जुड़े कई बड़े विस्फोट हो चुके हैं, जिनमें कई लोगों की जान गई और कई परिवार उजड़ गए। अधिकांश मामलों में अवैध निर्माण या अवैध भंडारण की बात सामने आई।






