नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के कार्यक्रम के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने रविवार को प्रधानमंत्री के भाषण पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि शिक्षा, रोजगार और युवाओं के कल्याण जैसे मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय कार्यक्रम को राजनीतिक भाषण में बदल दिया गया।
खड़गे ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं के सामने शिक्षा, रोजगार और भविष्य से जुड़े गंभीर सवाल हैं, लेकिन इन मुद्दों पर ठोस चर्चा के बजाय विपक्ष पर राजनीतिक टिप्पणियां की गईं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री के उस अंदाज पर भी सवाल उठाया जिसमें विपक्ष पर निशाना साधा गया। उनका कहना था कि सरकार को युवाओं की समस्याओं और देश की मौजूदा चुनौतियों पर जवाब देना चाहिए।
13 साल बाद SRCC पहुंचे थे मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को SRCC के शताब्दी समारोह में हिस्सा लिया। यह कॉलेज में उनकी करीब 13 साल बाद वापसी थी। इससे पहले वह 2013 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए SRCC आए थे।
इस बार प्रधानमंत्री के भाषण में आर्थिक विकास, भारत की बदलती तस्वीर और युवाओं की भूमिका जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। उन्होंने 2013 और आज के भारत के बीच तुलना करते हुए देश की आर्थिक प्रगति को रेखांकित किया।
मोदी ने विपक्ष पर भी साधा निशाना
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विपक्ष पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि कुछ लोग भारत के विकास और आर्थिक आंकड़ों को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं और उन्हें देश की मौजूदा स्थिति की तुलना 2013 से करनी चाहिए।
यही हिस्सा कांग्रेस को सबसे ज्यादा राजनीतिक प्रतिक्रिया देने का मौका दे गया।
SRCC का मंच बना सियासी बहस का केंद्र
आमतौर पर विश्वविद्यालय और शिक्षण संस्थानों के कार्यक्रमों में शिक्षा और युवाओं से जुड़े विषय केंद्र में रहते हैं। लेकिन इस बार SRCC के शताब्दी समारोह के बाद प्रधानमंत्री के भाषण और कांग्रेस की प्रतिक्रिया ने कार्यक्रम को सीधे राजनीतिक बहस में ला दिया है।
एक तरफ भाजपा इसे प्रधानमंत्री के विकास मॉडल और युवाओं से संवाद के रूप में पेश कर रही है, वहीं कांग्रेस का सवाल है कि युवाओं के सामने मौजूद बेरोजगारी और शिक्षा से जुड़े सवालों पर सरकार की वास्तविक उपलब्धियां क्या हैं।
हमारी निगाह से
यह विवाद केवल एक भाषण पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया नहीं है। SRCC जैसे युवा-केंद्रित मंच से प्रधानमंत्री का संदेश और उसके तुरंत बाद कांग्रेस का पलटवार दिखाता है कि 2026 की राजनीति में युवा, रोजगार और शिक्षा अब सिर्फ नीतिगत मुद्दे नहीं रहे—वे सीधे राजनीतिक नैरेटिव की लड़ाई बन चुके हैं। खास बात यह है कि दोनों पक्ष युवाओं को अपने-अपने राजनीतिक संदेश के केंद्र में रख रहे हैं।






