रांची। झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा विवाद अब सीधे राजनीतिक टकराव में बदल गया है। भारतीय जनता पार्टी ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन पर हमला तेज कर दिया है। भाजपा ने इसे सामान्य ‘पेपर लीक’ से कहीं गंभीर मामला बताते हुए ‘पेपर लूट’ करार दिया है और पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग उठाई है।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि सहायक वन संरक्षक और वन क्षेत्र पदाधिकारी की भर्ती परीक्षा से जुड़े प्रश्नपत्र स्ट्रॉन्ग रूम से निकाले गए और उनमें बदलाव किया गया।
भाजपा का दावा है कि जांच के दौरान सामने आई जानकारी में केवल प्रश्नपत्र की सुरक्षा में सेंध ही नहीं, बल्कि उत्तर पुस्तिकाओं और ओएमआर शीट में भी कथित बदलाव किए जाने के आरोप सामने आए हैं। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
भाजपा ने पूछा : राहुल गांधी चुप क्यों?
भाजपा ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय राजनीति से जोड़ते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। सुधांशु त्रिवेदी ने सवाल उठाया कि जो विपक्षी दल देश के दूसरे हिस्सों में परीक्षा और युवाओं के मुद्दे उठाते हैं, वे झारखंड में सामने आए आरोपों पर क्यों नहीं बोल रहे हैं।
कांग्रेस झारखंड की झामुमो नेतृत्व वाली सरकार में सहयोगी है। यही वजह है कि भाजपा अब इस मामले को छात्रों और भर्ती परीक्षाओं से आगे बढ़ाकर कांग्रेस की राजनीतिक जवाबदेही का मुद्दा बना रही है।
CBI जांच की मांग, सिर्फ गिरफ्तारियों से काम नहीं चलेगा
झारखंड भाजपा ने कहा है कि जांच का दायरा केवल अब तक सामने आए आरोपियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। पार्टी ने भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की सीबीआई से व्यापक जांच कराने की मांग की है।
भाजपा के मुताबिक जांच में परीक्षा एजेंसी की नियुक्ति, प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षा, मूल्यांकन प्रक्रिया, सॉफ्टवेयर तथा परिणाम जारी करने की पूरी व्यवस्था को शामिल किया जाना चाहिए।
8 से 11 सितंबर तक सड़क पर उतरेगी भाजपा
मामला अब आंदोलन तक पहुंच गया है। झारखंड भाजपा ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 8 से 11 सितंबर तक चार दिवसीय प्रदेशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है।
पार्टी के कार्यकर्ता सभी 24 जिलों में उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक कार्यालयों का घेराव करेंगे। भाजपा पहले ही सरकार को छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और भर्ती परीक्षाओं की जांच की मांग को लेकर अल्टीमेटम दे चुकी है।
छात्रों का मुद्दा बना विपक्ष का हथियार
झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों का असंतोष पहले से ही राजनीतिक दबाव बना रहा है। अब भाजपा ने इसे सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जोड़ दिया है।
यानी लड़ाई सिर्फ इस बात की नहीं रह गई है कि परीक्षा में क्या गड़बड़ी हुई। सवाल यह भी है कि सरकारी नौकरियों की परीक्षा में रखे गए प्रश्नपत्र और अभ्यर्थियों के भविष्य की सुरक्षा आखिर किसकी जिम्मेदारी है?
हमारी निगाह से
झारखंड में भर्ती परीक्षा विवाद अब सरकार बनाम अभ्यर्थी की सीमा से निकलकर भाजपा बनाम सत्तारूढ़ गठबंधन की सीधी राजनीतिक लड़ाई बनता दिखाई दे रहा है। भाजपा को यहां दोहरा मुद्दा मिल गया है—एक तरफ युवाओं की नाराजगी, दूसरी तरफ परीक्षा व्यवस्था की कथित खामियां। अब 8 सितंबर से शुरू होने वाला आंदोलन यह तय करेगा कि यह मुद्दा केवल राजनीतिक बयानबाजी तक रहता है या सरकार पर ठोस कार्रवाई का दबाव भी बनाता है।






