नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश की न्यायपालिका में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए आठ हाईकोर्ट में नए मुख्य न्यायाधीशों (Chief Justices) की नियुक्ति की है। रविवार को सामने आई नियुक्तियों में बॉम्बे और कलकत्ता हाईकोर्ट समेत कई महत्वपूर्ण हाईकोर्ट शामिल हैं। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब देश की अदालतों में लंबित मामलों और न्यायिक प्रशासन को लेकर लगातार सुधारों पर जोर दिया जा रहा है।
बॉम्बे हाईकोर्ट को मिला नया मुख्य न्यायाधीश
नियुक्तियों में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी को बॉम्बे हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया है। वहीं बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस रवींद्र वी. घुगे को कलकत्ता हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। दोनों हाईकोर्ट देश की न्यायिक व्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। इन नियुक्तियों का असर सिर्फ संबंधित अदालतों के प्रशासन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बड़े संवैधानिक, आपराधिक, नागरिक और कारोबारी मामलों की सुनवाई के संचालन पर भी पड़ेगा।

आठ हाईकोर्ट में बदला न्यायिक नेतृत्व
केंद्र की ओर से की गई इस प्रक्रिया के तहत कुल आठ हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पास प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होती हैं। वे अदालत की पीठों के गठन, मामलों के आवंटन और न्यायिक कामकाज के सुचारु संचालन में अहम भूमिका निभाते हैं।
इसलिए एक साथ आठ हाईकोर्ट में नेतृत्व परिवर्तन को न्यायपालिका के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नियुक्तियों के पीछे क्या है महत्व?
हाईकोर्ट देश की न्याय व्यवस्था की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण न्यायिक परत हैं। सुप्रीम कोर्ट के बाद बड़ी संख्या में संवैधानिक, प्रशासनिक और नागरिक मामलों की सुनवाई इन्हीं अदालतों में होती है।
ऐसे में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति केवल पद भरने की प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि अदालत के प्रशासन और न्यायिक प्राथमिकताओं को भी प्रभावित करती है। खासकर बड़े राज्यों और आर्थिक केंद्रों वाले राज्यों में हाईकोर्ट का कामकाज लाखों मुकदमों और हजारों वकीलों से जुड़ा होता है।

THE TREND निष्कर्ष
आठ हाईकोर्ट में एक साथ नए मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति न्यायपालिका के स्तर पर बड़ा बदलाव है। बॉम्बे और कलकत्ता जैसे प्रमुख हाईकोर्ट में नेतृत्व परिवर्तन पर विशेष नजर रहेगी। आने वाले दिनों में इन अदालतों में प्रशासनिक प्राथमिकताओं और महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई पर इसका असर दिखाई दे सकता है।







