सार : पटना में गंगा का 2016 का रिकॉर्ड टूटना इस बार की बाढ़ को सामान्य बाढ़ से अलग बनाता है। 10 लाख से ज्यादा लोगों के प्रभावित होने, कई नदियों के खतरे के निशान से ऊपर बहने और रविवार को गंगा के और बढ़ने के अनुमान ने बिहार की बाढ़ को आज की देश की सबसे बड़ी और सबसे गंभीर खबरों में ला खड़ा किया है।
पटना। बिहार में बाढ़ का संकट शनिवार को उस समय और गंभीर हो गया, जब राजधानी पटना के गांधी घाट पर गंगा ने अपना अब तक का सबसे ऊंचा बाढ़ स्तर पार कर लिया। शनिवार सुबह करीब 10 बजे गंगा का जलस्तर 50.53 मीटर दर्ज किया गया। यह अगस्त 2016 में दर्ज किए गए 50.52 मीटर के पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर से एक सेंटीमीटर अधिक है। लगातार बढ़ते पानी के बीच राज्य के 11 जिलों में करीब 10.26 लाख लोग प्रभावित बताए गए हैं। प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान तेज करते हुए संवेदनशील इलाकों में एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की टीमें और करीब 700 सरकारी नावें तैनात की हैं।

चार घंटे में 10 सेंटीमीटर बढ़ा गंगा का पानी
गांधी घाट पर शनिवार सुबह गंगा के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई। जल संसाधन विभाग के अनुसार चार घंटे के भीतर पानी करीब 10 सेंटीमीटर बढ़ा और सुबह 10 बजे 50.53 मीटर तक पहुंच गया। इस स्तर ने वर्ष 2016 में दर्ज पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि पानी अभी थमा नहीं है। विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक रविवार सुबह आठ बजे तक गांधी घाट पर जलस्तर 50.62 मीटर तक पहुंच सकता है। इसका मतलब है कि रविवार को भी पटना और गंगा किनारे के निचले इलाकों पर दबाव बना रह सकता है।
गंगा अकेली नहीं, कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर
बिहार में बाढ़ का दायरा सिर्फ पटना तक सीमित नहीं है। गंगा के साथ गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और घाघरा समेत कई नदियां अलग-अलग स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
गंगा पटना के दीघा और गांधी घाट के अलावा हाथीदह, बक्सर, मुंगेर, भागलपुर और कहलगांव में भी खतरे के निशान से ऊपर है। गंडक हाजीपुर और डुमरियाघाट में, जबकि कोसी खगड़िया के बलतारा और कटिहार के कुरसेला में खतरे के निशान से ऊपर दर्ज की गई है।
11 जिलों में 10 लाख से ज्यादा आबादी प्रभावित
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार बाढ़ से पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार और अररिया प्रभावित हैं। इन जिलों में 50 प्रखंड और 201 ग्राम पंचायतों तक बाढ़ का असर पहुंचा है।
निचले इलाकों में पानी भरने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई जगह ग्रामीण इलाकों में आवागमन के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। पटना सहित कई जिलों में राहत शिविर और सामुदायिक रसोई चलाकर प्रभावित लोगों तक भोजन और जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है।
33 टीमें और 693 नावें राहत-बचाव में जुटीं
बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने एनडीआरएफ की छह और एसडीआरएफ की 27 टीमें, यानी कुल 33 टीमें संवेदनशील इलाकों में तैनात की हैं। ये टीमें चौबीसों घंटे राहत और बचाव के लिए तैयार रखी गई हैं।
इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों में 693 सरकारी नावें संचालित की जा रही हैं। इनका इस्तेमाल लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, राहत सामग्री पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर बचाव अभियान में किया जा रहा है।

पुनपुन का बढ़ता पानी रेल यातायात के लिए भी चुनौती
पटना में गंगा के साथ पुनपुन नदी का बढ़ता जलस्तर भी चिंता बढ़ा रहा है। पुनपुन घाट के पास रेलवे ट्रैक तक पानी पहुंचने के कारण गया-पटना रेलखंड पर परिचालन प्रभावित हुआ है। आकाशवाणी के अनुसार रेलवे ब्रिज संख्या 21 के डाउन ट्रैक पर पानी आने के बाद ट्रेन परिचालन अगले आदेश तक रोक दिया गया।
इससे साफ है कि बाढ़ का असर सिर्फ गांवों और नदी किनारे के इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़क और रेल जैसी जरूरी सेवाओं पर भी पड़ने लगा है।
रविवार पर टिकी नजर, और बढ़ सकता है खतरा
अब सबसे बड़ी नजर रविवार सुबह के जलस्तर पर है। गांधी घाट पर 50.62 मीटर तक पानी पहुंचने के पूर्वानुमान के बीच निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा और बढ़ सकता है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी, राहत शिविरों में भोजन की व्यवस्था और तटबंधों की निगरानी के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण कर राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की है। अधिकारियों को प्रभावित परिवारों तक समय पर राहत पहुंचाने और तटबंधों तथा निचले इलाकों की लगातार निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।







